Thursday, February 29, 2024
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संतान की लंबी उम्र के लिए स्त्रियां रखती हैं जीवित्पुत्रिका व्रत

सुरेशचन्द गांधी पप्पू हाटा संवाददाता

👉महाभारत काल से चली आ रही यह परम्परा

एएमटी न्यूज हाटा कुशीनगर हिंदू परंपरा में हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल अश्विनी माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन स्त्रियां जीवित्पुत्रिका व्रत को रखती हैं । यह स्त्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण व्रत है। इसे जिउतिया व्रत भी कहा जाता है। स्त्रियों द्वारा भगवान की पूजा अर्चना करते हुए अपने सन्तान के सूख, सम्रद्धि व उनके उज्जवल भविष्य के लिए यह निर्जला व्रत रखती है । ऐसी मान्यता है संतान के लिए किया हुआ यह व्रत उनके बुरे समय में उनकी रक्षा करता है। यह व्रत महाभारत काल से चला रहा है । महाभारत में अभिमन्यु की पत्नी उत्तर के गर्भ से मृत बालक उत्पन्न हुआ था ।जिसे भगवान श्री कृष्णा ने उस मृत बालक को प्राण दान दिया था। । वही पुत्र पांडव वंश का भावी कर्णधार राजा परीक्षित हुआ । परीक्षित को इस तरह जीवन दान मिलने के कारण इस व्रत का नाम जीवित्पुत्रिका व्रत पड़ा । यह कठिन व्रत उत्तर प्रदेश ,बिहार, झारखंड, वेस्ट बेंगल में मुख्य रूप से प्रचलित है।

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